लखनऊ में साइबर सिक्योरिटी प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन

सिविल डिफेंस एवं अमन शांति समिति की संयुक्त पहल

लखनऊ। डिजिटल युग में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए आम नागरिकों को जागरूक करने के उद्देश्य से
4 जनवरी को सिविल डिफेंस एवं अमन शांति समिति के कार्यालय, तुरिया गंज, लखनऊ में एक
साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग वर्कशॉप का आयोजन किया गया।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का नेतृत्व मेहरुन्निसा ने किया।
कार्यशाला में क्षेत्र के नागरिकों को साइबर अपराधों की प्रकृति, उनके खतरों
और उनसे बचाव के व्यावहारिक उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का उद्देश्य

साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता

इस प्रशिक्षण कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आम जनता को साइबर क्राइम के प्रति सजग बनाना था।
आज के समय में मोबाइल फोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया का उपयोग तेजी से बढ़ा है,
जिसके साथ-साथ ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, ओटीपी धोखाधड़ी, फेक लिंक,
सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग जैसी घटनाएं भी लगातार सामने आ रही हैं।
कार्यशाला के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया गया कि थोड़ी सी लापरवाही
किस प्रकार बड़े आर्थिक और मानसिक नुकसान का कारण बन सकती है।

प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति

सम्मानित पदाधिकारियों ने बढ़ाया कार्यक्रम का मान

इस अवसर पर अमन शांति समिति के अध्यक्ष जनाब इमरान कुरेशी
तथा महामंत्री जनाब आज़ाद हफ़ीज़ (राष्ट्रपति पदक से सम्मानित)
की गरिमामयी उपस्थिति रही।
दोनों पदाधिकारियों ने अपने संबोधन में कहा कि
डिजिटल सुरक्षा आज केवल तकनीकी विषय नहीं,
बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बन चुकी है।
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे
डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग सोच-समझकर करें
और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित विभागों को दें।

विशेषज्ञों और वक्ताओं के विचार

साइबर सुरक्षा को बताया समय की आवश्यकता

कार्यशाला में अमन शांति समिति के सलाहकार
शेख सईद हुसैन, ज़ीनत खान, लक्ष्मी देवी, अजय,
गुफरान, सालेहीन, रिज़वान, रिहान,
डॉक्टर फ़राज़, इसराइल कुरैशी,
डॉ. असलम और इरफान ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए।
वक्ताओं ने बताया कि साइबर अपराधी
नए-नए तरीकों से लोगों को ठगने का प्रयास कर रहे हैं,
इसलिए हर नागरिक का डिजिटल रूप से जागरूक होना बेहद आवश्यक है।

आम नागरिकों के लिए दिए गए महत्वपूर्ण सुझाव

वक्ताओं ने नागरिकों को सलाह दी कि
वे किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर
अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
ओटीपी, बैंक डिटेल्स और पासवर्ड
किसी को भी न बताएं तथा
सोशल मीडिया अकाउंट्स में मजबूत पासवर्ड का उपयोग करें।
साथ ही, किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पहले
उसकी सत्यता जांचने की भी सलाह दी गई।

क्षेत्रीय नागरिकों की सहभागिता

बड़ी संख्या में लोगों ने लिया हिस्सा

इस साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग वर्कशॉप में
क्षेत्र के रिहान, रिज़वान, बकर, परवेज सहित
बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने सक्रिय सहभागिता की।
कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया,
जिसमें लोगों ने अपनी शंकाएं रखीं
और विशेषज्ञों से समाधान प्राप्त किया।
उपस्थित नागरिकों ने इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों को
अत्यंत उपयोगी बताया।

कार्यक्रम का समापन

जागरूक और सतर्क रहने का संदेश

कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ किया गया कि
साइबर अपराध से बचाव के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।
आयोजकों ने आश्वासन दिया कि
भविष्य में भी इस तरह के प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम
निरंतर आयोजित किए जाएंगे,
ताकि समाज का हर वर्ग डिजिटल रूप से सुरक्षित बन सके।
अंत में सभी प्रतिभागियों ने
सिविल डिफेंस एवं अमन शांति समिति के प्रयासों की सराहना की।

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