अमन व आस्था के समर्थन,अत्याचार व अन्याय के विरोध’ विषय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस

अमन व आस्था के समर्थन, अत्याचार व अन्याय के विरोध’ विषय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस

लखनऊ, 11 फरवरी: ‘अमन व इंसाफ़ तहरीक’ की ओर से उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब, लखनऊ में
‘अमन व आस्था के समर्थन, अत्याचार व अन्याय के विरोध’ विषय पर एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई।
इस कार्यक्रम में देश के प्रमुख धार्मिक और सामाजिक नेताओं ने भाग लेकर वैश्विक स्तर पर
बढ़ती अशांति, युद्धोन्माद और मानवाधिकार उल्लंघनों पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
सम्मेलन में मजलिस उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना कल्बे जवाद नक़वी, तंज़ीमुल मकातिब के सचिव
मौलाना सैय्यद सफी हैदर ज़ैदी और प्रसिद्ध आलिम मौलाना जहांगीर आलम क़ासमी सहित
कई उलेमा और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

वैश्विक हालात पर चिंता और विरोध

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मौलाना कल्बे जवाद नक़वी ने कहा कि दुनिया की वर्तमान स्थिति
अत्यंत चिंताजनक है। उनके अनुसार कुछ वैश्विक शक्तियां विश्व में अशांति और संघर्ष को बढ़ावा दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि इतिहास में औपनिवेशिक ताकतों ने कमजोर देशों पर कब्ज़ा कर उनके प्राकृतिक संसाधनों
और खनिज संपदा पर नियंत्रण स्थापित किया था, और आज भी वही प्रवृत्ति अलग रूप में जारी है।

उन्होंने अफगानिस्तान, इराक, सीरिया और लीबिया का उल्लेख करते हुए कहा कि इन देशों को
विभिन्न बहानों से अस्थिर किया गया। अब ईरान पर दबाव बनाया जा रहा है, जो क्षेत्रीय शांति के लिए
खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा कि वेनेज़ुएला की राजनीतिक स्थिति और तेल संसाधनों को लेकर
हो रही अंतरराष्ट्रीय राजनीति भी इसी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होती है।

ईरान के नेतृत्व को दी जा रही धमकियों की निंदा

मौलाना नक़वी ने कहा कि किसी भी संप्रभु राष्ट्र के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप अंतरराष्ट्रीय
कानून और नैतिकता के विरुद्ध है। उन्होंने ईरान के शीर्ष नेतृत्व को दी जा रही धमकियों की कड़ी निंदा की
और इसे अस्वीकार्य बताया। उनके अनुसार धार्मिक नेतृत्व और पवित्र स्थलों की गरिमा का सम्मान
सभी देशों को करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि धार्मिक स्थलों या नेतृत्व पर हमला किया जाता है तो इससे वैश्विक स्तर पर
तनाव और बढ़ेगा। उन्होंने भारत सरकार द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के पक्ष में
वोट देने पर आभार व्यक्त किया और उम्मीद जताई कि भारत शांति और न्याय के अपने ऐतिहासिक
रुख पर कायम रहेगा।

मीडिया की भूमिका पर प्रश्न

मौलाना ने मीडिया की भूमिका पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि मीडिया का दायित्व निष्पक्षता
और सत्य का समर्थन करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं को लेकर
मीडिया का दृष्टिकोण कई बार पक्षपातपूर्ण दिखाई देता है।
गाज़ा की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पत्रकारों और आम नागरिकों की मौतों
पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मीडिया अपने रवैये में सुधार नहीं करता, तो लोकतांत्रिक तरीके से
विरोध दर्ज कराया जाएगा। उनका कहना था कि विचारों की स्वतंत्रता और निष्पक्ष रिपोर्टिंग
लोकतंत्र की बुनियाद है।

पाकिस्तान में हिंसा और शिया समुदाय की स्थिति

मौलाना कल्बे जवाद नक़वी ने इस्लामाबाद की जामा मस्जिद में हुए आतंकी हमले की निंदा करते हुए
कहा कि पाकिस्तान में शिया समुदाय के खिलाफ हिंसा चिंताजनक है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय
से अपील की कि इस प्रकार की घटनाओं पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए और दोषियों के विरुद्ध
कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

राष्ट्रीय शांति अभियान की घोषणा

मौलाना सैय्यद सफी हैदर ज़ैदी ने कहा कि यह सम्मेलन अमन और इंसाफ़ के समर्थन में आयोजित किया गया है।
उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा सदैव शांति, सहिष्णुता और विविधता के सम्मान की रही है।
इसी भावना को सुदृढ़ करने के लिए ‘राष्ट्रीय शांति अभियान’ की घोषणा की गई।

उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत देशव्यापी हस्ताक्षर अभियान, शांतिपूर्ण प्रदर्शन,
सम्मेलन और सोशल मीडिया के माध्यम से जनजागरण किया जाएगा। उनका कहना था कि यह मुद्दा
किसी एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी मानवता से जुड़ा है।
यदि आज किसी एक राष्ट्र की संप्रभुता को चुनौती दी जाती है, तो कल अन्य देश भी असुरक्षित हो सकते हैं।

अत्याचार के विरुद्ध वैश्विक एकजुटता की अपील

मौलाना जहांगीर आलम क़ासमी ने कहा कि अत्याचार कहीं भी हो, उसकी निंदा की जानी चाहिए।
उन्होंने गाज़ा और पाकिस्तान की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि निर्दोषों की हत्या
मानवता के विरुद्ध अपराध है। उन्होंने विश्व समुदाय से अपील की कि न्याय और शांति के लिए
एकजुट होकर आवाज उठाई जाए।

उन्होंने कहा कि स्थायी शांति केवल संवाद, परस्पर सम्मान और न्यायपूर्ण नीतियों के माध्यम से
ही संभव है। आक्रामक और साम्राज्यवादी रवैया विश्व शांति के लिए बाधक है।

सम्मेलन में उपस्थित प्रमुख व्यक्तित्व

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौलाना सैय्यद कल्बे जवाद नक़वी, मौलाना सैय्यद सफी हैदर ज़ैदी,
मौलाना जहांगीर आलम क़ासमी, मौलाना रज़ा हुसैन रिज़वी, मौलाना सफदर हुसैन जौनपुरी,
मौलाना काज़िम मेहदी उरूज जौनपुरी, मौलाना आदिल फ़राज़ नक़वी तथा ओखला, दिल्ली से
एहसान अहमद सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

अंत में सभी वक्ताओं ने कहा कि अमन, न्याय और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए समाज के
सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे शांति,
सद्भाव और भाईचारे के संदेश को आगे बढ़ाएं और किसी भी प्रकार के अत्याचार और अन्याय
के विरुद्ध संगठित होकर आवाज उठाएं।

 

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