कर्बला तालकटोरा गेट से जुड़ी एक समर्पित ज़िंदगी का अंत
लखनऊ, 7 फरवरी 2026: लखनऊ की तहज़ीब, आपसी और धार्मिक सद्भाव की पहचान माने जाने वाले
ऐतिहासिक कर्बला तालकटोरा गेट से जुड़ी एक बेहद भावुक खबर सामने आई है।
कर्बला तालकटोरा गेट के लंबे समय तक वफादारी से चौकीदारी करने वाले ठाकुर साहब की चाची का
निधन हो गया। उनका जीवन पूरी तरह से कर्बला की सेवा, सुरक्षा और देखभाल को समर्पित रहा।
उनके देहांत की खबर से न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा इलाका शोक में डूब गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, वह केवल एक चौकीदार परिवार की सदस्य नहीं थीं, बल्कि
कर्बला की आत्मा और उसकी मूक संरक्षक थीं।
जीवनभर कर्बला की सेवा में समर्पण
सेवा को ही बनाया जीवन का उद्देश्य
ठाकुर साहब की चाची ने दशकों तक कर्बला तालकटोरा की पवित्र भूमि की देखभाल की।
उन्होंने इसे केवल एक ज़िम्मेदारी नहीं बल्कि अपनी इबादत और कर्तव्य माना।
दिन हो या रात, मौसम की सख्ती हो या त्योहारों की भीड़—वह हमेशा कर्बला की हिफाज़त में तत्पर रहीं।
स्थानीय लोग बताते हैं कि वह हर आने-जाने वाले पर नज़र रखती थीं,
साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखती थीं और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को सहन नहीं करती थीं।
उनका सादा जीवन और ऊँचे विचार लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत थे।
अंतिम संस्कार और भावभीनी विदाई
मोती झील श्मशान घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
ठाकुर साहब की चाची का अंतिम संस्कार मोती झील के श्मशान घाट पर संपन्न हुआ।
इस अवसर पर परिवारजन, स्थानीय नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और कर्बला से जुड़े लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
अंतिम विदाई के समय हर आंख नम थी। लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि
उन्होंने जिस निष्ठा और ईमानदारी से कर्बला की सेवा की, वह हमेशा याद रखी जाएगी।
धार्मिक सद्भाव और भाईचारे की जीवंत मिसाल
लखनऊ की गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक
ठाकुर साहब की चाची की सेवा को लोग लखनऊ की गंगा-जमुनी तहज़ीब का सच्चा उदाहरण मानते हैं।
यह वही शहर है जहां एक हिंदू परिवार पीढ़ियों से कर्बला की देखभाल करता है,
और वहीं मुस्लिम कारीगर मंदिरों की सीढ़ियां और संरचनाएं बनाते हैं।
उनकी ज़िंदगी यह संदेश देती है कि धर्म से ऊपर इंसानियत और सेवा होती है।
आज जब समाज में वैमनस्य की बातें होती हैं, ऐसे उदाहरण यह साबित करते हैं कि
भारत की असली ताकत आपसी सौहार्द और भाईचारे में है।
स्थानीय लोगों की श्रद्धांजलि
यादों में हमेशा ज़िंदा रहेंगी
परिवार और मोहल्ले के लोगों ने उनकी सादगी, अनुशासन और सेवा भावना को याद करते हुए
कहा कि वह हमेशा सभी के लिए सम्मान और अपनापन रखती थीं।
कर्बला तालकटोरा गेट के साथ उनका नाम हमेशा सम्मान से लिया जाएगा।
उनकी समर्पित ज़िंदगी आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाती रहेगी कि
धरोहरों की रक्षा केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक कर्तव्य भी है।
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