चाइनीज मांझा: एक जानलेवा खतरा
लखनऊ में 5 फरवरी 2026 को हुई एक दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि
चाइनीज मांझा केवल एक पतंग उड़ाने का साधन नहीं, बल्कि एक घातक हथियार बन चुका है।
पुराने लखनऊ के हैदरगंज फ्लाईओवर पर बाइक सवार शोएब की गर्दन चाइनीज मांझे से कट गई,
जिसके कारण मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना न सिर्फ उनके परिवार के लिए,
बल्कि पूरे समाज के लिए एक गहरा आघात है।
हैदरगंज फ्लाईओवर की दर्दनाक घटना
काम पर जाते वक्त छिन गई जिंदगी
32–33 वर्षीय शोएब, जो पेशे से एक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव थे, बुधवार को एवररेडी चौराहे
से चौक की ओर बाइक से जा रहे थे। अचानक सड़क पर लटकता चाइनीज मांझा उनकी गर्दन में
फंस गया। तेज धार वाले मांझे ने उनकी गर्दन को गंभीर रूप से काट दिया, जिससे उनकी
मौके पर ही मौत हो गई। आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले ही सब खत्म हो चुका था।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
दुबग्गा निवासी शोएब अपने पीछे पत्नी, दो मासूम बेटियों बुशरा और इकरा, तथा अपनी मां को
रोता-बिलखता छोड़ गए। परिवार की आर्थिक और भावनात्मक जिम्मेदारी अब अचानक उनके
कंधों से उतर गई है। इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर
कब तक मासूम लोग इस जानलेवा लापरवाही का शिकार होते रहेंगे।
मुख्यमंत्री का सख्त रुख और प्रशासनिक कार्रवाई
हत्या मानी जाएगी चाइनीज मांझे से मौत
घटना का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस और प्रशासन को सख्त
निर्देश दिए हैं कि चाइनीज मांझे से होने वाली मौतों को हत्या माना जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बैन के बावजूद अगर कोई इस खतरनाक मांझे की बिक्री या उपयोग
करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।
पुराने लखनऊ में तेज हुई छापेमारी
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद पश्चिमी जोन के बाजारखाला थाना क्षेत्र सहित पुराने
लखनऊ की कई पतंग दुकानों पर पुलिस ने छापेमारी की।
इन कार्रवाइयों के दौरान बड़ी मात्रा में चाइनीज मांझा बरामद किया गया और कुछ दुकानदारों
को हिरासत में लिया गया।
पूरे प्रदेश में अभियान का विस्तार
फैक्ट्रियां और होलसेल सप्लायर भी रडार पर
पुलिस का यह अभियान अब केवल खुदरा दुकानों तक सीमित नहीं है।
पूरे प्रदेश में फैक्ट्रियों और होलसेल सप्लायर्स को भी निशाने पर लिया जा रहा है।
हालांकि कई दुकानदारों का दावा है कि वे केवल स्वदेशी सूती मांझा ही बेचते हैं,
लेकिन पुलिस हर स्तर पर जांच कर रही है।
कानूनी प्रावधान और सख्त सजा
कानून क्या कहता है?
चाइनीज मांझे पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और विभिन्न अदालतों द्वारा पूर्ण प्रतिबंध
लगा हुआ है। इसके बावजूद यदि कोई व्यक्ति इसकी बिक्री या उपयोग करता है,
तो उस पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत 5 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना
लग सकता है।
BNS की धाराएं और मुकदमा
इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 188 के तहत 6 महीने तक की सजा का भी
प्रावधान है। पुलिस ने इस मामले में गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है,
जिससे साफ संकेत मिलता है कि अब ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लिया जाएगा।
समाज और नागरिकों की जिम्मेदारी
सावधानी और जागरूकता जरूरी
प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे केवल सूती मांझे का ही इस्तेमाल करें और
सड़क पर चलते समय विशेष सतर्कता बरतें।
माता-पिता को भी बच्चों को सुरक्षित पतंगबाजी के नियम समझाने चाहिए,
ताकि किसी और परिवार को शोएब जैसे दर्द से न गुजरना पड़े।
निष्कर्ष
लखनऊ की यह घटना एक चेतावनी है कि चाइनीज मांझा केवल एक गैरकानूनी वस्तु नहीं,
बल्कि जानलेवा खतरा है। जब तक प्रशासन की सख्ती के साथ-साथ समाज की जिम्मेदारी और
जागरूकता नहीं बढ़ेगी, तब तक ऐसे हादसे रुकना मुश्किल है।
शोएब की मौत को केवल एक खबर बनकर नहीं रह जाना चाहिए,
बल्कि इसे बदलाव की शुरुआत बनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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