सज्जाद टाइम्स
लखनऊ।
रजिस्टर्ड एनजीओ सज्जाद एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी ने लखनऊ की ऐतिहासिक हुसैनाबाद ट्रस्ट से जुड़ी धरोहरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। छोटा इमामबाड़ा, बड़ा इमामबाड़ा, रूमी गेट, घंटाघर, पिक्चर गैलरी और शीश महल जैसी विश्वविख्यात इमारतें पुरातत्व विभाग (ASI) के अधीन संरक्षित स्मारक हैं। इसके बावजूद इन स्मारकों के 100 से 200 मीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र में कथित रूप से अवैध निर्माण और सार्वजनिक जमावड़ा लगातार जारी है।
पुरातत्व संरक्षण अधिनियम (AMASR Act, 1958) के तहत किसी भी संरक्षित स्मारक के 100 मीटर के दायरे को निषिद्ध क्षेत्र और 200 मीटर तक के दायरे को नियंत्रित क्षेत्र घोषित किया गया है, जहां किसी भी प्रकार का निर्माण या व्यावसायिक गतिविधि कानूनन प्रतिबंधित है। लेकिन हकीकत यह है कि रूमी गेट से महज 100 मीटर की दूरी पर “लजीज गली” के नाम से अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियां खुलेआम संचालित हो रही हैं।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि घंटाघर के सामने फूड कॉर्नर, पिक्चर गैलरी और शीश महल के आसपास टुंडे कबाबी जैसी दुकानों पर रातभर भारी भीड़ जमा रहती है। इससे न केवल कानून का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि ऐतिहासिक इमारतों की संरचना और गरिमा को भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है। संविधान के अनुच्छेद 49 के अनुसार ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व की धरोहरों की रक्षा करना सरकार का दायित्व है, लेकिन जिला प्रशासन की कथित निष्क्रियता से आमजन में रोष बढ़ता जा रहा है।
मौलाना कल्बे जवाद का अल्टीमेटम
इस पूरे मामले में शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जवाद ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने वकीलों की टीम के साथ लजीज गली का निरीक्षण कर हुसैनाबाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और इसे भ्रष्टाचारपूर्ण करार दिया। मौलाना कल्बे जवाद ने चेतावनी दी कि यदि दो दिनों के भीतर अवैध निर्माण नहीं हटाया गया, तो बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उनके इस अल्टीमेटम को शिया समुदाय और ऐतिहासिक धरोहरों से प्रेम करने वाले नागरिकों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले फूल मंडी रोड चौड़ीकरण के खिलाफ उनकी मुहिम सफल रही थी।
निडर पत्रकारिता की भूमिका
सज्जाद टाइम्स के रिपोर्टर और पत्रकार जमाल मिर्जा ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से हुसैनाबाद ट्रस्ट में हो रहे अवैध निर्माण की पोल खोलते हुए इस मामले को शासन-प्रशासन और आम जनता तक पहुंचाया। उनकी रिपोर्टिंग का ही नतीजा रहा कि पहले रोड चौड़ीकरण के नाम पर हुसैनाबाद ट्रस्ट की जमीन लेने की कोशिश को प्रशासन को रोकना पड़ा। अब एक बार फिर उन्होंने लजीज गली, टुंडे कबाबी और अन्य अवैध गतिविधियों को उजागर कर ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की मांग तेज कर दी है।
शिया धर्मगुरुओं और संगठनों का समर्थन
इस मुद्दे पर शिया धर्मगुरुओं का भी खुला समर्थन सामने आया है। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना यासुफ अब्बास ने एक अधिवेशन में अवैध निर्माण पर आपत्ति जताई, वहीं चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास ने वीडियो जारी कर इन गतिविधियों की कड़ी निंदा की।
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मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
इतिहास और धरोहर प्रेमी नागरिकों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की अपील की है। उनका कहना है कि यदि कानून का राज कायम करना है तो ASI नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। लोगों की मांग है कि अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाकर ऐतिहासिक इमारतों की रक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी लखनऊ की इस बेशकीमती विरासत को सुरक्षित देख सकें।
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