सालिम मेंहदी इमाम ए ज़माना ट्रस्ट ने की मुलाकात माननीय राजनाथ सिंह से


सज्जाद टाइम्स

**आफताब-ए-शरीयत मौलाना सैयद कल्बे जवाद साहब की माननीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात, कौमी व सियासी मुद्दों पर हुई अहम बातचीत**

देश के प्रतिष्ठित इस्लामी विद्वान, आफताब-ए-शरीयत मौलाना सैयद कल्बे जवाद साहब ने माननीय रक्षा मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता श्री राजनाथ सिंह साहब के नई दिल्ली स्थित आवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर देश और समाज से जुड़े विभिन्न **कौमी (सामाजिक)** एवं **सियासी (राजनीतिक)** विषयों पर गंभीर एवं सार्थक विचार-विमर्श हुआ।

इस अहम मुलाकात में मौलाना सैयद कल्बे जवाद साहब के साथ **सरिम मेहंदी**, ट्रस्टी *इमाम-ए-ज़माना ट्रस्ट, लखनऊ* तथा **बीजेपी करकुन इब्ने हसन शानू**, कोलकाता भी मौजूद रहे। बैठक का माहौल सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक रहा, जिसमें राष्ट्रीय एकता, आपसी भाईचारा, सामाजिक समरसता तथा अल्पसंख्यक समाज से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा की गई।

मौलाना सैयद कल्बे जवाद साहब ने देश में अमन-शांति, गंगा-जमुनी तहज़ीब और आपसी भाईचारे को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता और आपसी सौहार्द में निहित है, जिसे हर हाल में संरक्षित किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने शिक्षा, युवाओं के भविष्य, धार्मिक सद्भाव और सामाजिक न्याय जैसे विषयों को भी बातचीत के दौरान प्रमुखता से उठाया।

माननीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह साहब ने मौलाना साहब के विचारों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के सिद्धांत पर कार्य कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की एकता और अखंडता सर्वोपरि है तथा सभी वर्गों के हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक और धार्मिक नेताओं की भूमिका समाज को सही दिशा देने में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

इस अवसर पर **सरिम मेहंदी** ने सामाजिक सेवा, ट्रस्ट के कार्यों और जनकल्याण से जुड़े प्रयासों की जानकारी दी, वहीं **इब्ने हसन शानू** ने देशभर में अल्पसंख्यक समाज की सहभागिता और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर अपने विचार रखे। दोनों ही प्रतिनिधियों ने संवाद और सकारात्मक राजनीति को समय की आवश्यकता बताया।

बैठक को दोनों पक्षों ने अत्यंत उपयोगी और सार्थक बताया। यह मुलाकात न केवल एक शिष्टाचार भेंट रही, बल्कि देश में सामाजिक सौहार्द, संवाद और सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।
राजनीतिक और धार्मिक नेतृत्व के बीच इस तरह के संवाद से समाज में सकारात्मक संदेश जाता है और लोकतंत्र की जड़ों को मजबूती मिलती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *