लखनऊ के ऐतिहासिक हुसैनाबाद एंड एलाइड ट्रस्ट को लेकर उत्तर प्रदेश वक्फ न्यायाधिकरण में प्रिंस मिर्ज़ा कायम रज़ा ने उत्तर प्रदेश सरकार, शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड समेत कई पक्षों के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया है। वक्फ कानून के जाने-माने वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद हुसैन रिजवी द्वारा दाखिल इस याचिका ने वक्फ बोर्ड में हलचल मचा दी है। अगली सुनवाई 27 जनवरी 2026 को निर्धारित है।प्रिंस मिर्ज़ा का दावा है कि ट्रस्ट की संपत्ति कभी वक्फ संपत्ति नहीं रही। ट्रस्ट डीड के मुताबिक, इसका प्रबंधन उन्हें सौंपा जाना चाहिए। लेकिन असली मुद्दा है ट्रस्ट की संपत्तियों पर काबिज दुकानदारों का ‘कम किराया, ज्यादा मुनाफा’ का गोरखधंधा।दुकानदारों का ‘शिकमी’ खेल: कैसे हो रही है ठगी?नाममात्र किराया ट्रस्ट को: दुकानदार ट्रस्ट को मात्र कुछ सौ रुपये मासिक किराया देते हैं, जबकि बाजार मूल्य इससे कई गुना ज्यादा है।शिकमी किरायेदारों का जाल: ये दुकानदार खुद को ‘मुख्य किरायेदार’ बताकर सब-लेट (शिकमी) किरायेदार बिठा देते हैं। शिकमी वाले असली किरायेदारों से मोटा मुनाफा वसूलते हैं – कभी-कभी मूल किराए से 10-20 गुना ज्यादा!उदाहरण से समझें: मान लीजिए ट्रस्ट को 500 रुपये मिलते हैं, तो शिकमी किरायेदार 5,000-10,000 रुपये तक चुकाते हैं। फर्क? दुकानदार की जेब में जाता है, ट्रस्ट को कुछ नहीं।अवैध निर्माण का बोलबाला: इसी बीच, खुलेआम अवैध बोरियां और मकान बन रहे हैं, जो ट्रस्ट की संपत्ति को लूट रहे हैं।प्रिंस मिर्ज़ा ने अदालत से मांग की है कि इस ‘लूट तंत्र’ को रोका जाए, ट्रस्ट प्रबंधन उन्हें सौंपा जाए और किरायेदारी व्यवस्था की पारदर्शी जांच हो। यह मुकदमा न सिर्फ ट्रस्ट के भविष्य को तय करेगा, बल्कि वक्फ संपत्तियों पर व्याप्त भ्रष्टाचार पर भी रोशनी डालेगा।वक्फ बोर्ड के सूत्रों का कहना है कि यह याचिका कई पुराने विवादों को हवा दे सकती है। क्या होगा 27 जनवरी को अगली तारीख
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